| Hindi Literature | हिन्दी के कवि | |
हिन्दी के कवि बैरीसाल (जन्म 1719ई. मृत्युकाल अज्ञात) बैरीसाल फतेहपुर जिले के एक ब्राह्मण वंश में उत्पन्न हुए। ये अत्यंत शिष्ट और नम्र स्वभाव के थे। इनकी केवेल 'भाषा-भरण नाम की एक पुस्तक मिलती है, जिसकी अधिकांश रचना दोहों में है। इनके दोहों में सरसता, भाव तरलता तथा अनूठापन है। ये बिहारी के उत्कृष्ट दोहों की टक्कर के ज्ञात होते हैं। दोहे ऐसे ही इन कमल कुल, जीत लियो निज रंग। लसत लाल डोरेऽरु सित, चखन पूतरी स्याम। कर छुटाइ भजि दुरि गई, कनक पूतरिन माहिं। निज प्रतिबिंबन में दुरी, मुकुीर धाम सुखदानि। बिरह तई लखि नरदई, मारत नहीं सकात। तोष लहत नहिं एक सों, जात और के धाम। अलि ये उडगन अगिनि कन, अंक धूम अवधारि। करत नेह हरि सों भटू, क्यों नहिं कियो बिचार। सेत कमल कर लेत ही, अरुन कमल छबि देत।
|