वात्स्यायन का कामसूत्र वात्स्यायन के कामसूत्र का हिन्दी अनुवाद संस्कृत श्लोक सहित वात्स्यायन के कामसूत्र में कुल सात भाग हैं। प्रत्येक भाग कई अध्यायों में बँटे हैं। प्रत्येक अध्याय में कई श्लोक हैं। साहित्यप्रेमियों की सुविधा के लिए पहले संस्कृत श्लोक और उसके नीचे उसका हिन्दी अनुवाद दिया गया है। पूरे कामसूत्र को कामसूत्र पेज के दिए गये बटन अथवा अगला पृष्ट अगला पृष्ट करते हुए पढ़ा जा सकता है।
वात्स्यायन का कामसूत्र संस्कृत में पढें वात्स्यायन का कामसूत्र अंग्रेजी में पढें संभोग के विभिन्न आसन की संभोग चित्र सहित सूची देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
महर्षि वात्स्यायन का जन्म बिहार राज्य में हुआ था और प्राचीन भारत के महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक हैं। महर्षि वात्स्यायन ने कामसूत्र में न केवल दाम्पत्य जीवन का श्रृंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी संपदित किया है। अर्थ के क्षेत्र में जो स्थान कौटिल्य का है, काम के क्षेत्र में वही स्थान महर्षि वात्स्यायन का है। महर्षि वात्स्यायन का कामसूत्र विश्व की प्रथम यौन संहिता है जिसमें यौन प्रेम के मनोशारीरिक सिद्धान्तों तथा प्रयोग की विस्तृत व्याख्या एवं विवेचना की गई है। अधिकृत प्रमाण के अभाव में महर्षि का काल निर्धारण नहीं हो पाया है। परन्तु अनेक विद्वानों तथा शोधकर्ताओं के अनुसार महर्षि ने अपने विश्वविख्यात ग्रन्थ कामसूत्र की रचना ईसा की तृतीय शताब्दी के मध्य में की होगी। तदनुसार विगत सत्रह शताब्दिओं से कामसूत्र का वर्चस्व समस्त संसार में छाया रहा है और आज भी कायम है। संसार की हर भाषा में इस ग्रन्थ का अनुवाद हो चुका है। इसके अनेक भाष्य एवं संस्करण भी प्रकाशित हो चुके हैं। वैसे इस ग्रन्थ के जयमंगला भाष्य को ही प्रमाणिक माना गया है। कोई दो सौ वर्ष पूर्व प्रसिद्ध भाषाविद सर रिचर्ड एफ़ बर्टन (Sir Richard F. Burton) ने जब ब्रिटेन में इसका अंग्रेज़ी अनुवाद करवाया तो चारों ओर तहलका मच गया । अरब के विख्यात कामशास्त्र ‘सुगन्धित बाग’ पर भी इस ग्रन्थ की अमिट छाप है। महर्षि के कामसूत्र ने न केवल दाम्पत्य जीवन का श्रृंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी संपदित किया है। राजस्थान की दुर्लभ यौन चित्रकारी तथा खाजुराहो, कोणार्क आदि की जीवन्त शिल्पकला भी कामसूत्र से अनुप्राणित है। रीतिकालीन कवियों ने कामसूत्र की मननोहारी झांकियां प्रस्तुत की हैं तो गीत गोविन्द के गायक जयदेव ने अपनी लघु पुस्तिका ‘रति-मंजरी’ में कामसूत्र का सार संक्षेप प्रस्तुत कर अपने काव्य कौशल का अद्भुत परिचय दिया है। काम की व्याख्या ग्रंथ मे काम की व्याख्या द्वि-आयामी है। प्रथम सामान्य एवं द्वितीय विशेष। सामान्य के अन्तर्गत पंचेन्द्रिओं द्वारा प्राप्त होने वाले आनन्द एवं रोमांच का समावेश किया गया है जिसका प्रत्यक्ष सम्बन्ध मन एवं चेतना से जुड़ा हुआ है। इन्हीं के द्वारा मनोशारीरिक क्रिया एवं प्रतिक्रिया का संचालन होता है। विशेष के अन्तर्गत स्पर्शेन्द्रिओं की भूमिका प्रतिपादित की गई है। शिश्न और योनि अत्यन्त संवेदनशील स्पर्शेन्द्रिआं हैं। इन्हीं का पारस्परिक मिलन एवं घर्षण सम्भोग है जिसकी अन्तिम परिणति चरमोत्कर्ष (Climax) एवं स्खलन (Ejaculation) में होती है। दाम्पत्य कामसूत्र ने दाम्पत्य उल्लास एवं संतृप्ति के लिए यौन-क्रीड़ा को आधार माना है। दाम्पत्य जीवन में उल्लास एवं उमंग का संचार तभी होता है जब पति पत्नी दोनों में मानसिक तालमेल हो, दोनों एक दूसरे के परिपूरक बनने का प्रयास करें तथा यौन क्रीड़ा के समय पारस्परिक सहयोग करें और अपने अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ निरन्तर आगे बढ़ते रहें। दाम्पत्य जीवन में सतत रसवर्षा के लिए ही महर्षि ने अपने कामसूत्र में यौन प्रेम के रहस्यों का उद्घाटन किया है एवं यौन क्रीड़ा तथा तकनीक का सूक्ष्म तथा विस्तृत वर्णन प्रस्तुत किया है। काम एक अत्यन्त शक्तिशाली मूल प्रवृत्ति (Instinct) है। काम ही जीवन का संपदन, जीवन का उद्गम, उसके अस्तित्व तथा उसकी गतिशीलता तथा नर-नारी के पारस्परिक अकर्षण एवं सम्मोहन का रहस्य है। वास्तव में काम ही विवाह एवं दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला है। काम का सम्मोहन ही नर-नारी को वैवाहिक-सूत्र में आबद्ध करता है। अतः विवाहित जीवन में आनन्द की निरन्तर रस-वर्षा करते रहना ही कामसूत्र का वास्तविक उद्देश्य है। काम-विषयक अन्य प्राचीन ग्रन्थ पंचशक्य स्मरप्रदीप रतिमंजरी रसमंजरी अनंग रंग
अब भी ज़्यादातर भारतीयों का मानना है कि सेक्स ज्ञान के लिए दूसरी शताब्दी में वात्स्यायन द्वारा लिखी गई 'कामसूत्र' से बेहतर कोई किताब नहीं है। लेकिन कामसूत्र की प्रसिद्धि सिर्फ भारत तक ही नहीं है। दुनिया की कई भाषाओं में इसका अनुवाद किया गया है और इसने लोगों तक सेक्स ज्ञान को परोसने में अहम रोल प्ले किया है। कामसूत्र महर्षि वात्सायन द्वारा लिखा गया भारत का एक प्राचीन कामशास्त्र ग्रंथ है। दुनिया भर में यौन बिमारीयों और एड्स के बढते चलन के कारण इस प्राचीन पुस्तक पर लोगों का खूब ध्यान गया है। खास कर पश्चिम के देशों में यह काफी लोकप्रिय हुआ है और इसमें लोगों की उत्सुकता बढी है। कामसूत्र को उसके विभिन्न आसनों के लिए ही जाना जाता है. संभोग के विभिन्न आसन की संभोग चित्र सहित सूची देखने के लिए यहाँ क्लिक करें Click here to read Kamasutra in Hindi Click here to read Kamasutra in English Click here to read Kamasutra in Sanskrit
|